इकाई 1: परिचय
अर्थशास्त्र क्या है? अर्थशास्त्र का अर्थ, अर्थशास्त्र का क्षेत्र ,अर्थशास्त्र के कार्य, अर्थशास्त्र में सांख्यिकी का महत्व एवं उपयोगिता
इकाई 2: आँकड़ों का संग्रह, संगठन एवं प्रस्तुतीकरण
1. आँकड़ों का संग्रह आँकड़ों के स्रोत प्राथमिक आँकड़े द्वितीयक आँकड़े प्रतिचयन (Sampling) की अवधारणा सहित मूल आँकड़ों का संग्रह आँकड़े एकत्र करने की विधियाँ द्वितीयक आँकड़ों के कुछ महत्वपूर्ण स्रोत: भारत की जनगणना राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO)
2. आँकड़ों का संगठन चर (Variables) का अर्थ एवं प्रकार आवृत्ति वितरण (Frequency Distribution)
3. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण सारणीबद्ध प्रस्तुतीकरण आरेखीय प्रस्तुतीकरण:ज्यामितीय रूप दण्ड आरेख (Bar Diagram) वृत्त आरेख (Pie Diagram)आवृत्ति आरेख हिस्टोग्राम (Histogram) आवृत्ति बहुभुज (Frequency Polygon) संचयी आवृत्ति वक्र/ओजाइव (Ogive)अंकगणितीय रेखा ग्राफ समय-श्रृंखला ग्राफ (Time Series Graph)
इकाई 3: सांख्यिकीय उपकरण एवं व्याख्या
सभी संख्यात्मक प्रश्नों और उनके समाधानों में उपयुक्त आर्थिक व्याख्या करने का प्रयास किया जाना चाहिए। इसका अर्थ है कि विद्यार्थियों को प्रश्न हल करने के साथ-साथ प्राप्त परिणामों की आर्थिक दृष्टि से व्याख्या भी करनी चाहिए।1. केंद्रीय प्रवृत्ति के माप अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean) माध्यिका (Median) बहुलक (Mode)
2. सहसंबंध (Correlation) सहसंबंध का अर्थ एवं गुण बिखराव आरेख (Scatter Diagram) सहसंबंध के माप: कार्ल पियर्सन की विधि दो चरों के असमूहीकृत आँकड़ों के लिए स्पीयरमैन का रैंक सहसंबंध गैर-पुनरावृत्त रैंक (Non-Repeated Ranks) पुनरावृत्त रैंक (Repeated Ranks)
3. सूचकांक संख्याओं का परिचय सूचकांक संख्या का अर्थ सूचकांक संख्याओं के प्रकार: थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index – WPI) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production – IIP) सूचकांक संख्याओं के उपयोग मुद्रास्फीति और सूचकांक संख्याएँ सरल समग्र विधि (Simple Aggregative Method)
