परिचय
जब हम विकास (Development) शब्द सुनते हैं, तो सामान्यतः हमारे मन में बेहतर जीवन, अधिक आय, अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, रोजगार, सुरक्षित वातावरण और आधुनिक सुविधाओं जैसी बातें आती हैं।
लेकिन अर्थशास्त्र में विकास का अर्थ केवल अधिक पैसा कमाना या अधिक वस्तुओं का उपभोग करना नहीं है। किसी व्यक्ति या समाज के लिए विकास का अर्थ अलग-अलग हो सकता है।
एक व्यक्ति के लिए विकास का अर्थ अच्छी नौकरी और अधिक आय हो सकता है, जबकि दूसरे के लिए सम्मान, स्वतंत्रता, सुरक्षित वातावरण या गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसीलिए विकास को समझने के लिए हमें केवल आय नहीं, बल्कि जीवन के अनेक पहलुओं को देखना पड़ता है।
1. विकास क्या है?
विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति या समाज अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और अन्य लक्ष्यों की प्राप्ति करना चाहता है।
विकास का अर्थ केवल आय में वृद्धि नहीं है। इसमें लोगों की आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वतंत्रता, सम्मान, समान अवसर और जीवन की गुणवत्ता जैसे पहलू भी शामिल हो सकते हैं।
सरल शब्दों में
यदि किसी व्यक्ति की आय बढ़ती है, लेकिन उसे अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा या सुरक्षित वातावरण नहीं मिलता, तो केवल आय बढ़ने को पूर्ण विकास नहीं कहा जा सकता।
उदाहरण
मान लीजिए दो परिवार हैं।
परिवार A
- आय अधिक है।
- लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलती।
- आसपास स्वास्थ्य सुविधाएँ कमजोर हैं।
- परिवार को प्रदूषित वातावरण में रहना पड़ता है।
परिवार B
- आय परिवार A से थोड़ी कम है।
- बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है।
- पास में अस्पताल है।
- स्वच्छ पानी और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध है।
ऐसी स्थिति में केवल आय देखकर यह कहना उचित नहीं होगा कि परिवार A का जीवन हर दृष्टि से बेहतर है।
इससे स्पष्ट होता है कि विकास बहुआयामी अवधारणा है।
2. अलग-अलग लोगों के अलग-अलग विकास लक्ष्य
विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर व्यक्ति के विकास के लक्ष्य समान नहीं होते।
किसी व्यक्ति के लिए जो चीज विकास का प्रतीक है, वह किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उतनी महत्वपूर्ण नहीं हो सकती।
उदाहरण 1 — किसान
एक किसान के लिए विकास का अर्थ हो सकता है:
- सिंचाई की बेहतर सुविधा
- फसल का उचित मूल्य
- कृषि के लिए सस्ती ऋण सुविधा
- अच्छी सड़क
- बिजली की नियमित आपूर्ति
- कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी
उदाहरण 2 — विद्यार्थी
एक विद्यार्थी के लिए विकास का अर्थ हो सकता है:
- अच्छी शिक्षा
- योग्य शिक्षक
- पुस्तकें और डिजिटल संसाधन
- सुरक्षित विद्यालय
- उच्च शिक्षा के अवसर
- रोजगार की संभावना
उदाहरण 3 — मजदूर
एक मजदूर के लिए विकास का अर्थ हो सकता है:
- नियमित रोजगार
- उचित मजदूरी
- काम की सुरक्षित परिस्थितियाँ
- सामाजिक सुरक्षा
- सम्मानजनक व्यवहार
उदाहरण 4 — महिला
एक महिला के लिए विकास का अर्थ हो सकता है:
- शिक्षा
- रोजगार के समान अवसर
- सुरक्षित सार्वजनिक स्थान
- निर्णय लेने की स्वतंत्रता
- समान सम्मान
- अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार
इसलिए विकास की कोई एक ऐसी परिभाषा नहीं हो सकती जो प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं को समान रूप से व्यक्त कर सके।
3. विकास के लक्ष्य अलग क्यों होते हैं?
लोगों की परिस्थितियाँ, आवश्यकताएँ, प्राथमिकताएँ और समस्याएँ अलग-अलग होती हैं। इसलिए उनके विकास के लक्ष्य भी अलग हो सकते हैं।
इन लक्ष्यों को प्रभावित करने वाले कुछ प्रमुख कारक हैं:
- आय
- व्यवसाय
- आयु
- शिक्षा
- सामाजिक स्थिति
- स्थान
- परिवार की आवश्यकताएँ
- उपलब्ध अवसर
- सुरक्षा
- स्वास्थ्य
- भविष्य की आकांक्षाएँ
उदाहरण
एक शहर में रहने वाले विद्यार्थी के लिए तेज इंटरनेट और अच्छी डिजिटल सुविधाएँ महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
लेकिन किसी ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी के लिए सबसे पहले विद्यालय तक पहुँचने के लिए सड़क और नियमित बिजली अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
दोनों के लक्ष्य अलग हैं, लेकिन दोनों अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहते हैं।
4. परस्पर विरोधी विकास लक्ष्य
कभी-कभी दो व्यक्तियों या समूहों के विकास लक्ष्य एक-दूसरे के विपरीत हो सकते हैं।
अर्थात् किसी एक व्यक्ति या समूह को लाभ पहुँचाने वाली गतिविधि दूसरे व्यक्ति या समूह के लिए समस्या पैदा कर सकती है।
इसे परस्पर विरोधी विकास लक्ष्य कहा जाता है।
उदाहरण — बाँध का निर्माण
मान लीजिए किसी क्षेत्र में एक बड़ा बाँध बनाया जाता है।
इससे:
- बिजली का उत्पादन बढ़ सकता है।
- सिंचाई की सुविधा मिल सकती है।
- कुछ क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ सकता है।
- उद्योगों को पानी और बिजली मिल सकती है।
लेकिन दूसरी ओर:
- कुछ गाँवों की भूमि डूब क्षेत्र में आ सकती है।
- लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ सकता है।
- विस्थापित लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
इस प्रकार एक परियोजना कुछ लोगों के लिए विकास का माध्यम हो सकती है, जबकि उसी परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए यह कठिनाई का कारण बन सकती है।
मुख्य बात
विकास का मूल्यांकन करते समय यह देखना आवश्यक है कि विकास से लाभ किसे मिल रहा है और उसकी लागत कौन वहन कर रहा है।
5. आय और अन्य लक्ष्य
आय विकास का एक महत्वपूर्ण साधन है क्योंकि अधिक आय से व्यक्ति अपनी अनेक आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।
अधिक आय से व्यक्ति:
- बेहतर भोजन खरीद सकता है।
- शिक्षा पर खर्च कर सकता है।
- स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त कर सकता है।
- बेहतर आवास प्राप्त कर सकता है।
- परिवहन की सुविधा ले सकता है।
- अन्य आवश्यक वस्तुएँ और सेवाएँ खरीद सकता है।
लेकिन केवल आय ही पर्याप्त नहीं है।
लोग आय के साथ-साथ कई अन्य चीजें भी चाहते हैं।
गैर-आर्थिक लक्ष्य
लोगों के लिए निम्नलिखित लक्ष्य भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं:
- सम्मान
- समान व्यवहार
- स्वतंत्रता
- सुरक्षा
- स्वच्छ वातावरण
- अच्छा स्वास्थ्य
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- सामाजिक न्याय
- बेहतर कार्य परिस्थितियाँ
उदाहरण
दो कर्मचारियों की आय समान है।
लेकिन:
कर्मचारी A को सम्मानजनक वातावरण, सुरक्षित कार्यस्थल और निश्चित कार्य समय मिलता है।
कर्मचारी B को समान आय तो मिलती है, लेकिन उसे असुरक्षित वातावरण में लंबे समय तक काम करना पड़ता है।
दोनों की आय समान होने के बावजूद उनके जीवन की परिस्थितियाँ समान नहीं हैं।
इससे पता चलता है कि आय के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्य भी विकास का हिस्सा हैं।
6. राष्ट्रीय विकास
जब हम पूरे देश के विकास की बात करते हैं, तो प्रश्न उठता है कि देश के लिए विकास का अर्थ क्या है?
किसी देश के लिए राष्ट्रीय विकास में अनेक बातें शामिल हो सकती हैं, जैसे:
- आर्थिक प्रगति
- रोजगार के अवसर
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- बुनियादी सुविधाएँ
- गरीबी में कमी
- सामाजिक समानता
- सुरक्षा
- बेहतर जीवन स्तर
- पर्यावरण की रक्षा
लेकिन यहाँ भी समस्या यह है कि देश के सभी लोगों की आवश्यकताएँ समान नहीं होतीं।
एक नीति से किसी क्षेत्र को लाभ हो सकता है, जबकि दूसरे क्षेत्र पर उसका प्रभाव अलग हो सकता है।
इसलिए राष्ट्रीय विकास का अर्थ केवल राष्ट्रीय आय बढ़ाना नहीं है।
राष्ट्रीय विकास का व्यापक अर्थ
ऐसा विकास जिसमें देश की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ लोगों के जीवन की गुणवत्ता, अवसरों, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं में सुधार हो तथा विकास के लाभ अधिक व्यापक रूप से उपलब्ध हों।
7. विभिन्न देशों या राज्यों की तुलना
जब हम दो देशों या राज्यों के विकास की तुलना करना चाहते हैं, तो हमें किसी मापदंड की आवश्यकता होती है।
यदि हम केवल यह कहें कि “देश A अधिक विकसित है और देश B कम विकसित है”, तो हमें यह बताना होगा कि हम किस आधार पर यह तुलना कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए हम तुलना कर सकते हैं:
- प्रति व्यक्ति आय
- साक्षरता
- स्वास्थ्य
- जीवन प्रत्याशा
- शिशु मृत्यु दर
- सार्वजनिक सुविधाएँ
- रोजगार
- गरीबी आदि।
8. प्रति व्यक्ति आय
विभिन्न देशों या राज्यों की औसत आय की तुलना करने के लिए प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) का उपयोग किया जाता है।
सूत्र
प्रति व्यक्ति आय = कुल आय ÷ कुल जनसंख्या
उदाहरण
मान लीजिए किसी राज्य की कुल आय ₹20 करोड़ है और उसकी जनसंख्या 5 लाख है।
प्रति व्यक्ति आय:
₹20 करोड़ ÷ 5 लाख
= ₹400 प्रति व्यक्ति
इस प्रकार उस राज्य की प्रति व्यक्ति आय ₹400 होगी।
प्रति व्यक्ति आय का महत्व
केवल कुल आय की तुलना करने से सही तस्वीर नहीं मिलती क्योंकि अलग-अलग राज्यों या देशों की जनसंख्या अलग होती है।
उदाहरण:
| राज्य | कुल आय | जनसंख्या |
| A | ₹100 करोड़ | 10 लाख |
| B | ₹80 करोड़ | 4 लाख |
राज्य A की कुल आय अधिक है।
लेकिन राज्य B की प्रति व्यक्ति आय अधिक हो सकती है क्योंकि उसकी जनसंख्या कम है।
इसलिए तुलना करते समय प्रति व्यक्ति आय अधिक उपयोगी हो सकती है।
9. औसत आय की सीमाएँ
प्रति व्यक्ति आय एक उपयोगी मापदंड है, लेकिन यह विकास की पूरी तस्वीर नहीं बताती।
सबसे महत्वपूर्ण समस्या यह है कि औसत आय आय के वितरण को नहीं बताती।
उदाहरण
दो परिवारों की कुल आय ₹1,00,000 है।
यदि:
स्थिति A
- परिवार के सभी सदस्यों की आय लगभग समान है।
स्थिति B
- एक व्यक्ति की आय बहुत अधिक है और बाकी सदस्यों की आय बहुत कम है।
दोनों स्थितियों में औसत आय समान हो सकती है, लेकिन जीवन की वास्तविक परिस्थितियाँ अलग हो सकती हैं।
इसलिए केवल औसत आय के आधार पर विकास का पूर्ण मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
प्रति व्यक्ति आय आवश्यक है, लेकिन पर्याप्त नहीं।
हमें विकास को समझने के लिए आय के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक संकेतकों को भी देखना चाहिए।
10. आय और विकास के अन्य मापदंड
विकास का अध्ययन करते समय केवल आय नहीं देखी जाती।
कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक मापदंड हैं:
1. स्वास्थ्य
लोगों को कितनी अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलती हैं, यह विकास का महत्वपूर्ण संकेतक है।
2. शिक्षा
लोगों को विद्यालय और उच्च शिक्षा तक कितनी पहुँच है तथा शिक्षा की गुणवत्ता कैसी है, यह भी महत्वपूर्ण है।
3. जीवन प्रत्याशा
औसतन किसी व्यक्ति के कितने वर्षों तक जीवित रहने की अपेक्षा की जाती है, यह स्वास्थ्य और जीवन की परिस्थितियों का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
4. शिशु मृत्यु दर
कम आयु में बच्चों की मृत्यु की स्थिति स्वास्थ्य सुविधाओं और जीवन परिस्थितियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।
5. सार्वजनिक सुविधाएँ
स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, स्वच्छ पानी, स्वच्छता, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सुविधाएँ भी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
11. सार्वजनिक सुविधाएँ
सार्वजनिक सुविधाएँ (Public Facilities) वे सुविधाएँ हैं जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायता करती हैं और जिन्हें अक्सर सरकार या सार्वजनिक संस्थाएँ उपलब्ध कराती हैं।
उदाहरण:
- सरकारी विद्यालय
- सरकारी अस्पताल
- स्वच्छ पेयजल
- स्वच्छता व्यवस्था
- सड़कें
- सार्वजनिक परिवहन
- बिजली
- सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ
सार्वजनिक सुविधाएँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?
हर व्यक्ति के पास पर्याप्त आय नहीं होती कि वह सभी आवश्यक सेवाएँ निजी रूप से खरीद सके।
यदि अच्छी स्वास्थ्य सेवा केवल निजी अस्पतालों में उपलब्ध हो और उसकी लागत बहुत अधिक हो, तो कम आय वाले परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करना कठिन हो सकता है।
इसी प्रकार यदि शिक्षा केवल महंगे निजी विद्यालयों में उपलब्ध हो, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के अवसर सीमित हो सकते हैं।
इसलिए सार्वजनिक सुविधाएँ समान अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
12. स्वास्थ्य विकास का महत्वपूर्ण संकेतक क्यों है?
किसी देश या राज्य की वास्तविक प्रगति समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि वहाँ के लोग कितने स्वस्थ हैं।
यदि किसी समाज में:
- स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध हैं,
- डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हैं,
- स्वच्छ पानी मिलता है,
- स्वच्छता की अच्छी व्यवस्था है,
- बच्चों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ मिलती हैं,
तो लोगों की जीवन-स्थितियाँ बेहतर हो सकती हैं।
उदाहरण
दो राज्यों की प्रति व्यक्ति आय समान है।
लेकिन:
राज्य A
- बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ
- कम शिशु मृत्यु दर
- बेहतर स्वच्छता
राज्य B
- स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित
- स्वच्छ पानी की कमी
- स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ अधिक
केवल आय के आधार पर दोनों राज्यों को समान स्तर का विकसित मानना उचित नहीं होगा।
13. मानव विकास
विकास को केवल आर्थिक वृद्धि के रूप में देखने के बजाय जब हम मनुष्य के जीवन की गुणवत्ता को केंद्र में रखते हैं, तो इसे व्यापक रूप से मानव विकास के दृष्टिकोण से समझा जाता है।
मानव विकास में प्रमुख रूप से ऐसे पहलू शामिल हैं जो व्यक्ति की क्षमताओं और जीवन के अवसरों को बेहतर बनाते हैं।
इसमें विशेष रूप से:
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- आय
- जीवन स्तर
जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं।
मानव विकास का मूल विचार
विकास का अंतिम उद्देश्य केवल अधिक वस्तुओं का उत्पादन करना नहीं है।
विकास का उद्देश्य लोगों को बेहतर जीवन जीने के अवसर प्रदान करना है।
14. विश्व बैंक का दृष्टिकोण
विभिन्न संस्थाएँ देशों के विकास को मापने के लिए अलग-अलग संकेतकों का उपयोग करती हैं।
विश्व बैंक लंबे समय से देशों की तुलना में प्रति व्यक्ति आय जैसे आर्थिक संकेतकों का उपयोग करता रहा है।
आय का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि आय व्यक्ति की वस्तुओं और सेवाओं तक पहुँच को प्रभावित करती है।
लेकिन केवल आय से विकास के सभी पहलुओं को नहीं समझा जा सकता।
15. UNDP का दृष्टिकोण
UNDP का पूरा नाम है:
United Nations Development Programme
हिंदी में इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कहा जाता है।
UNDP विकास को केवल आय के आधार पर नहीं देखता, बल्कि मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को भी महत्व देता है।
इस व्यापक दृष्टिकोण में:
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- आय
जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।
महत्वपूर्ण अंतर
सरल रूप में समझें:
केवल आय आधारित दृष्टिकोण:
“लोगों की औसत आय कितनी है?”
मानव विकास आधारित दृष्टिकोण:
“लोग कितने स्वस्थ हैं, कितने शिक्षित हैं और उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है?”
इसलिए विकास को समझने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अधिक व्यापक जानकारी प्रदान करता है।
16. विकास की स्थिरता
विकास केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं होना चाहिए।
हमें यह भी सोचना चाहिए कि आज हम जिन संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं, उनका भविष्य की पीढ़ियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
यही विचार सतत विकास (Sustainable Development) की ओर ले जाता है।
सतत विकास का अर्थ
ऐसा विकास जो वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करे, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को नुकसान न पहुँचाए।
उदाहरण
यदि किसी क्षेत्र में भूजल का उपयोग बहुत तेजी से किया जाए और नए जल स्रोतों का संरक्षण न किया जाए, तो वर्तमान में पानी उपलब्ध रहेगा, लेकिन भविष्य में जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
इसके विपरीत यदि:
- जल संरक्षण किया जाए,
- वर्षा जल का संचयन किया जाए,
- पानी का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाए,
तो वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जा सकता है।
17. विकास और प्राकृतिक संसाधन
आर्थिक गतिविधियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।
उदाहरण:
- जल
- भूमि
- वन
- खनिज
- ऊर्जा संसाधन
उद्योगों, कृषि, परिवहन और घरेलू आवश्यकताओं में इन संसाधनों का उपयोग होता है।
लेकिन प्राकृतिक संसाधन सीमित हो सकते हैं।
यदि उनका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग किया जाए, तो वे कम हो सकते हैं या पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
उदाहरण
यदि किसान लगातार भूजल का अत्यधिक दोहन करता है, तो जल स्तर नीचे जा सकता है।
यदि जंगलों की अत्यधिक कटाई होती है, तो:
- जैव विविधता प्रभावित हो सकती है।
- मिट्टी का क्षरण बढ़ सकता है।
- स्थानीय पर्यावरण प्रभावित हो सकता है।
इसलिए विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन आवश्यक है।
18. पर्यावरणीय क्षरण
आर्थिक विकास के साथ यदि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और प्रदूषण बढ़ता है, तो पर्यावरणीय क्षरण हो सकता है।
इसके उदाहरण हैं:
- वायु प्रदूषण
- जल प्रदूषण
- मिट्टी का क्षरण
- वनों की कमी
- भूजल का अत्यधिक दोहन
- प्राकृतिक संसाधनों का क्षय
उदाहरण
किसी शहर में उद्योगों की संख्या तेजी से बढ़ती है।
इससे:
- रोजगार बढ़ सकता है।
- उत्पादन बढ़ सकता है।
- लोगों की आय बढ़ सकती है।
लेकिन यदि उद्योगों से निकलने वाला अपशिष्ट बिना उपचार के नदी में डाला जाए, तो जल प्रदूषण बढ़ सकता है।
इसलिए केवल उत्पादन और आय में वृद्धि को विकास का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
19. वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए विकास
विकास की वास्तविक चुनौती यह है कि वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं को पूरा करे और साथ ही भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखे।
मान लीजिए किसी गाँव में भूमिगत जल का पर्याप्त भंडार है।
यदि वर्तमान पीढ़ी इसका बहुत अधिक उपयोग कर लेती है, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी कम हो सकता है।
इसलिए विकास की योजना बनाते समय दो प्रश्न महत्वपूर्ण हैं:
- क्या वर्तमान लोगों की आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं?
- क्या भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्याप्त संसाधन बचेंगे?
यही सतत विकास की मूल भावना है।
20. विकास को मापने का बहुआयामी दृष्टिकोण
अब तक की चर्चा से स्पष्ट है कि विकास को किसी एक संख्या से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता।
एक व्यापक मूल्यांकन में निम्नलिखित पहलुओं को देखा जा सकता है:
आर्थिक पहलू
- प्रति व्यक्ति आय
- रोजगार
- आर्थिक अवसर
सामाजिक पहलू
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- समानता
- सामाजिक सुरक्षा
सार्वजनिक सुविधाएँ
- विद्यालय
- अस्पताल
- स्वच्छ पानी
- स्वच्छता
- परिवहन
पर्यावरणीय पहलू
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
- प्रदूषण नियंत्रण
- जल संरक्षण
- पर्यावरण की गुणवत्ता
इसलिए आधुनिक विकास की समझ बहुआयामी है।
21. विकास के बारे में महत्वपूर्ण निष्कर्ष
अध्याय की पूरी चर्चा को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है:
1. विकास का अर्थ सभी के लिए समान नहीं है।
हर व्यक्ति की परिस्थितियाँ और प्राथमिकताएँ अलग होती हैं।
2. आय विकास का महत्वपूर्ण साधन है।
अधिक आय से अनेक आवश्यकताओं को पूरा करना आसान होता है।
3. केवल आय विकास का पर्याप्त मापदंड नहीं है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुविधाएँ भी महत्वपूर्ण हैं।
4. औसत आय असमानता को पूरी तरह नहीं दिखाती।
एक ही औसत आय के पीछे आय का वितरण अलग-अलग हो सकता है।
5. सार्वजनिक सुविधाएँ महत्वपूर्ण हैं।
सरकारी विद्यालय, अस्पताल, स्वच्छ पानी और स्वच्छता जैसी सुविधाएँ लोगों के जीवन को बेहतर बनाती हैं।
6. विकास के लक्ष्य कभी-कभी विरोधी हो सकते हैं।
एक समूह को मिलने वाला लाभ दूसरे समूह के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
7. राष्ट्रीय विकास व्यापक होना चाहिए।
देश की प्रगति का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचना महत्वपूर्ण है।
8. मानव विकास में व्यक्ति केंद्र में होता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और आय जैसे पहलू मानव जीवन की गुणवत्ता से जुड़े हैं।
9. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है।
असीमित संसाधन मानकर उनका उपयोग करना भविष्य के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
10. सतत विकास आवश्यक है।
वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए।
22. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण शब्दावली
| शब्द | सरल अर्थ |
| विकास | जीवन की परिस्थितियों और अवसरों में सुधार |
| विकास लक्ष्य | वह लक्ष्य जिसे व्यक्ति या समाज जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्राप्त करना चाहता है |
| प्रति व्यक्ति आय | कुल आय को कुल जनसंख्या से विभाजित करने पर प्राप्त औसत आय |
| औसत आय | कुल आय ÷ कुल जनसंख्या |
| सार्वजनिक सुविधाएँ | ऐसी सुविधाएँ जो लोगों के सामूहिक हित में उपलब्ध कराई जाती हैं |
| मानव विकास | मानव जीवन की गुणवत्ता और क्षमताओं को केंद्र में रखकर विकास को समझना |
| सतत विकास | वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं की क्षमता को सुरक्षित रखना |
| पर्यावरणीय क्षरण | पर्यावरण की गुणवत्ता और प्राकृतिक संसाधनों में गिरावट |
23. एक उदाहरण से पूरा अध्याय समझें
मान लीजिए “सूर्यपुर” नाम का एक राज्य है।
राज्य की सरकार ने एक नई औद्योगिक परियोजना शुरू की।
परियोजना से:
- नए रोजगार पैदा हुए।
- उत्पादन बढ़ा।
- कुछ लोगों की आय बढ़ी।
- राज्य को अधिक आर्थिक गतिविधि मिली।
लेकिन कुछ समय बाद पता चला कि:
- परियोजना के कारण कुछ परिवारों को विस्थापित होना पड़ा।
- नदी में प्रदूषण बढ़ने लगा।
- आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने लगा।
- भूजल का स्तर कम होने लगा।
अब प्रश्न है:
क्या केवल उत्पादन और आय बढ़ने के कारण इसे पूर्ण विकास कहा जा सकता है?
नहीं।
हमें यह भी देखना होगा:
- रोजगार से किसे लाभ मिला?
- विस्थापित लोगों की स्थिति क्या हुई?
- पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?
- लोगों के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा?
- क्या प्राकृतिक संसाधन भविष्य के लिए सुरक्षित हैं?
यह उदाहरण बताता है कि विकास एक बहुआयामी प्रक्रिया है।
24. अध्याय का संक्षिप्त सार
विकास का अर्थ केवल अधिक आय या अधिक उत्पादन नहीं है। लोगों के विकास लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं और कभी-कभी एक-दूसरे से विरोधी भी हो सकते हैं।
आय विकास का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन अकेली आय विकास की पूरी तस्वीर नहीं देती। इसलिए विभिन्न देशों और राज्यों की तुलना करते समय प्रति व्यक्ति आय के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे संकेतकों को भी देखना आवश्यक है।
विकास का व्यापक दृष्टिकोण मानव जीवन की गुणवत्ता को केंद्र में रखता है। साथ ही, विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हो और भविष्य की पीढ़ियों के हित सुरक्षित रहें।
इस प्रकार विकास को समझने के लिए आय + स्वास्थ्य + शिक्षा + सार्वजनिक सुविधाएँ + समान अवसर + पर्यावरण संरक्षण + भविष्य की पीढ़ियों के हित सभी को ध्यान में रखना आवश्यक है।
