वैश्वीकरण (Globalisation)

वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, प्रौद्योगिकी और सूचनाओं के राष्ट्रीय सीमाओं के पार आदान-प्रदान के कारण एक-दूसरे से अधिक जुड़ती हैं और एक-दूसरे पर अधिक निर्भर हो जाती हैं।

सरल शब्दों में: वैश्वीकरण का अर्थ है कि व्यापार, व्यवसाय, उत्पादन और निवेश के माध्यम से विभिन्न देश एक-दूसरे से अधिक जुड़ रहे हैं।

वैश्वीकरण का उदाहरण: एक स्मार्टफोन

भारत में बेचे जाने वाले किसी स्मार्टफोन का प्रोसेसर अमेरिका में डिज़ाइन किया जा सकता है, उसके विभिन्न पुर्जे दक्षिण कोरिया और जापान में बनाए जा सकते हैं तथा उसकी अंतिम असेंबली (पुर्जों को जोड़कर तैयार करना) चीन में की जा सकती है। इसके बाद उस स्मार्टफोन का निर्यात करके भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में बेचा जा सकता है।

यह वैश्वीकरण का उदाहरण है, क्योंकि एक ही उत्पाद के निर्माण और बिक्री में कई देश शामिल होते हैं। इस प्रकार प्रौद्योगिकी, उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से उनकी अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं।

वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक

प्रौद्योगिकी में परिवर्तन और सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण वैश्वीकरण का विकास हुआ है। NCERT के दृष्टिकोण के अनुसार, वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले दो प्रमुख कारक हैं:

  1. प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार
  2. व्यापार और निवेश का उदारीकरण

1. प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार (Rapid Improvement in Technology)

प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले सबसे महत्त्वपूर्ण कारकों में से एक है। परिवहन, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए विकास ने विभिन्न देशों के बीच संपर्क को अधिक आसान, तेज़ और कम खर्चीला बना दिया है।

पहले, लंबी दूरी तक वस्तुओं को पहुँचाने में बहुत समय लगता था। इसी प्रकार, दूसरे देशों में रहने वाले लोगों से संपर्क करना धीमा और महँगा होता था। लेकिन आधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास ने इन कठिनाइयों को काफी हद तक कम कर दिया है।

A. परिवहन में सुधार (Improvement in Transportation)

आधुनिक परिवहन सुविधाओं, जैसे कंटेनर जहाज़ों, हवाई जहाज़ों, रेलगाड़ियों और बेहतर सड़क नेटवर्क ने विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और लोगों की आवाजाही को अधिक तेज़ और प्रभावी बना दिया है।

उदाहरण: भारत की कोई कंपनी भारत में कपड़े तैयार करके आधुनिक मालवाहक जहाज़ों की सहायता से बड़ी मात्रा में यूरोप के ग्राहकों तक पहुँचा सकती है। इससे कंपनी को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलता है।

B. संचार प्रौद्योगिकी में सुधार (Improvement in Communication Technology)

कंप्यूटर, मोबाइल फोन, इंटरनेट, ई-मेल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के विकास ने अंतरराष्ट्रीय संचार को बहुत तेज़ और आसान बना दिया है।

उदाहरण: भारत की कोई सॉफ्टवेयर कंपनी अमेरिका की किसी कंपनी से ऑनलाइन ऑर्डर प्राप्त कर सकती है, इंटरनेट के माध्यम से अपने कर्मचारियों से संपर्क कर सकती है, भारत में ही सॉफ्टवेयर तैयार कर सकती है और उसे डिजिटल माध्यम से अमेरिकी ग्राहक तक पहुँचा सकती है।

इस प्रकार, व्यवसायों को दूसरे देशों में यात्रा किए बिना ही वहाँ के ग्राहकों और व्यावसायिक साझेदारों के साथ काम करने का अवसर मिलता है।

C. उत्पादन प्रौद्योगिकी में सुधार (Improvement in Production Technology)

आधुनिक उत्पादन प्रौद्योगिकी कंपनियों को उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाएँ अलग-अलग देशों में संचालित करने में सक्षम बनाती है।

उदाहरण: एक स्मार्टफोन के पुर्जे कई देशों में बनाए जा सकते हैं, उसे किसी दूसरे देश में असेंबल किया जा सकता है और फिर दुनिया भर में बेचा जा सकता है। आधुनिक प्रौद्योगिकी और संचार की सहायता से कंपनी इन सभी गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सकती है।

प्रौद्योगिकी में सुधार वैश्वीकरण को कैसे संभव बनाता है?

  • यह वस्तुओं के परिवहन को तेज़ और कम खर्चीला बनाता है।
  • यह राष्ट्रीय सीमाओं के पार तुरंत संचार करने में सहायता करता है।
  • यह उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं को अलग-अलग देशों में संचालित करना संभव बनाता है।
  • यह वस्तुओं और सेवाओं के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देता है।
  • यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों को दुनिया भर में अपनी गतिविधियों का समन्वय करने में सहायता करता है।

इसलिए, प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार ने अंतरराष्ट्रीय उत्पादन, व्यापार और संचार को आसान बनाकर वैश्वीकरण को प्रोत्साहित किया है।

2. व्यापार और निवेश का उदारीकरण (Liberalisation of Trade and Investment)

व्यापार और निवेश का उदारीकरण वैश्वीकरण को संभव बनाने वाला एक अन्य प्रमुख कारक है।

उदारीकरण का अर्थ है विदेशी व्यापार और निवेश पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना या कम करना। इससे व्यवसायों के लिए वस्तुओं का आयात और निर्यात करना आसान हो जाता है तथा विदेशी कंपनियों को दूसरे देशों में निवेश करने के अधिक अवसर मिलते हैं।

A. व्यापार उदारीकरण का अर्थ (Meaning of Trade Liberalisation)

व्यापार उदारीकरण का अर्थ है सरकार द्वारा आयात और निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को कम करना।

सरकारें व्यापार पर निम्नलिखित प्रतिबंध लगा सकती हैं:

  • उच्च आयात शुल्क (Import Duties/Tariffs): विदेशों से आने वाली वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर।
  • आयात कोटा (Import Quotas): विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं की मात्रा पर निर्धारित सीमा।
  • आयात लाइसेंस और अन्य व्यापार संबंधी नियम: वस्तुओं के आयात को नियंत्रित करने वाले नियम और अनुमतियाँ।

जब इन प्रतिबंधों को कम किया जाता है, तो विदेशी वस्तुओं का घरेलू बाज़ार में प्रवेश आसान हो जाता है और घरेलू उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचना भी अधिक सरल हो जाता है।

उदाहरण: यदि सरकार इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर आयात शुल्क कम कर देती है, तो विदेशों से आने वाली इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ भारत में अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिल सकते हैं और घरेलू उत्पादकों को अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

B. निवेश उदारीकरण का अर्थ (Meaning of Investment Liberalisation)

निवेश उदारीकरण का अर्थ है किसी देश में विदेशी कंपनियों द्वारा निवेश करने पर लगाए गए प्रतिबंधों को कम करना।

जब ऐसे प्रतिबंध कम किए जाते हैं, तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत में कारखाने, कार्यालय और अन्य व्यावसायिक इकाइयाँ स्थापित करना आसान हो सकता है।

उदाहरण: कोई विदेशी वाहन निर्माता कंपनी भारत में कारखाना स्थापित कर सकती है, भारतीय श्रमिकों को रोजगार दे सकती है, भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से पुर्जे खरीद सकती है और वाहनों को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेच सकती है।

इस प्रकार का निवेश भारत में होने वाले उत्पादन को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ सकता है।

C. भारत ने उदारीकरण क्यों शुरू किया?

स्वतंत्रता के बाद भारत ने ऐसी आर्थिक नीतियाँ अपनाईं जिनके अंतर्गत घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए आयात और विदेशी निवेश पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे।

हालाँकि, 1990 के दशक के आरंभ में भारत ने प्रमुख आर्थिक सुधार लागू किए। इन सुधारों के अंतर्गत विदेशी व्यापार और निवेश पर लगाए गए कई प्रतिबंधों को कम किया गया।

इन सुधारों से विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना और भारतीय व्यवसायों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भाग लेना आसान हो गया।

उदारीकरण वैश्वीकरण को कैसे संभव बनाता है?

  • यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बाधाओं को कम करता है।
  • यह वस्तुओं के आयात और निर्यात को आसान बनाता है।
  • यह विदेशी निवेश के नए अवसर पैदा करता है।
  • यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने में सहायता करता है।
  • यह घरेलू उत्पादकों और उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ता है।
  • यह घरेलू और विदेशी उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है।

इसलिए, उदारीकरण ने व्यापार और निवेश के माध्यम से विभिन्न देशों को एक-दूसरे से अधिक निकटता से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिका (Quick Revision Table)

कारकवैश्वीकरण को संभव बनाने में भूमिका
परिवहन में तीव्र सुधारवस्तुओं की आवाजाही को तेज़ और कम खर्चीला बनाता है।
संचार प्रौद्योगिकी में सुधारविभिन्न देशों के बीच तेज़ संचार संभव बनाता है।
उत्पादन प्रौद्योगिकी में सुधारउत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं को अलग-अलग देशों में संचालित करना संभव बनाता है।
व्यापार का उदारीकरणआयात और निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को कम करता है।
निवेश का उदारीकरणविदेशी निवेश को आसान बनाता है।
समग्र प्रभावविभिन्न देशों के बीच आर्थिक एकीकरण और परस्पर निर्भरता को बढ़ाता है।

निष्कर्ष

प्रौद्योगिकी में तीव्र सुधार ने विभिन्न देशों को आपस में जुड़ना आसान बनाया है, जबकि व्यापार और निवेश के उदारीकरण ने इन संबंधों पर लगे प्रतिबंधों को कम किया है। इन दोनों कारकों ने मिलकर वैश्वीकरण को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।